Thursday, May 14th, 2026

एचबीटीयू ने खोजी फफूंदी, जाजमऊ का जल होगा अब सुरक्षित

कानपूर

कानपुर में गंगा किनारे बसे जाजमऊ के लोगों को शुद्ध गंगाजल मिलेगा। उन्हें टेनरी के कचरे की वजह से क्रोमियमयुक्त जहरीला पानी नहीं पीना पड़ेगा। जहां भूगर्भ जल में क्रोमियम मिल गया है, उन्हें भी राहत मिलेगी। एचबीटीयू के वैज्ञानिकों ने पहली बार ऐसी फफूंदी खोजी है, जो क्रोमियम को अपनी सतह पर सोख लेती है और पानी क्रोमियम मुक्त होकर शुद्ध हो जाता है। यह फफूंदी जाजमऊ की मिट्टी में ही खोजी गई है।

एचबीटीयू के स्कूल ऑफ फार्मास्युटिकल एंड बायोलॉजिकल साइंसेज ने इसकी खोज की है। इसके बाद फफूंदी को पुणे की नेशनल केमिकल लैबोरेट्री में भेजा गया। पता चला कि इसके पहले एस्परजीलस प्रॉलीफरेंस नाम की इस फफूंदी का किसी को पता नहीं था। इस पर इसे एस्परजीलस प्रोलीफरेंस एलए नाम दिया गया। पुणे लैब में फफूंदी को एनसीआईएम1473 कोड नंबर दिया गया।

इस फंगस को लैब में भी विकसित किया जा सकता है
यह शोध जर्नल ऑफ केमिस्ट्री एंड एनवायरमेंट और अन्य जर्नल में प्रकाशित हुआ है। शोध के अगुवा स्कूल ऑफ फार्मास्युटिकल एंड बायोलॉजिकल साइंसेज के डीन प्रोफेसर ललित कुमार सिंह ने बताया कि इस फंगस को लैब में विकसित किया जा सकता है। पानी में डालकर इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। फफूंदी जो क्रोमियम को सोखती है, उसे रिकवर भी कर लिया जाता है।  इसे निकालकर पानी को शुद्ध करके क्रोमियम का अन्य जगह इस्तेमाल किया जा सकता है।

टेनरी के बगल के मैदान की मिट्टी से निकाली गई है फफूंदी
क्रोमियम निकालने में फफूंदी का प्रयोग करने के बाद अब पानी के दूसरे घातक धातु तत्वों को निकालने में इसका इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि क्रोमियम एस्परजीलस प्रोलीफरेंस एलए के शोध में चार साल का समय लगा है। इस शोध को और विस्तारित करेंगे जिससे लोगों को पीने के लिए शुद्ध पानी मिल सके। यह फफूंदी एक टेनरी के बगल के मैदान की मिट्टी से निकाली गई। इसके बाद इस पर कार्य किया गया, तो जल शुद्धिकरण में उपयोगिता पता चली।

एक पात्र में बगास डाली गई। उसमें एस्परजीलस प्रोलीफरेंस एलए को डालकर विकसित किया गया। जब फफूंदी विकसित हुई तो इसमें क्रोमियम युक्त पानी डाला गया। क्रोमियम के कण फफूंदी की सतह पर जम गए। जो पानी बाहर निकला, वह शुद्ध रहा। इसका इस्तेमाल व्यक्तिगत तौर पर या किसी स्थान पर सामूहिक तौर पर जल शुद्धिकरण के लिए किया जा सकता है।  -प्रोफेसर ललित कुमार सिंह, डीन, एचबीटीयू

ये बीमारियां हो सकतीं
क्रोमियम के कारण त्वचा में जलन, नाक के अल्सर, फेफड़े और सांस की बीमारियां, कैंसर, त्वचा पर क्रोम अल्सर, पाचन तंत्र की समस्या, लिवर, किडनी और तंत्रिकाओं को नुकसान, अस्थमा आदि बीमारियां हो सकती हैं।

हजारों लोग क्रोमियम युक्त पानी पीने को मजबूर
शहर में करीब 75 हजार से अधिक आबादी क्रोमियम युक्त पानी पीने के लिए मजबूर है। जाजमऊ, वाजिदपुर, नौरैयाखेड़ा, मोतीपुर, मदारपुर, प्योंदी, किसनपुर समेत आसपास के 20 गांव सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इसके अलावा शहर के बीच में जूही बंबुरहिया, तेजाब मिल काॅलोनी आदि इलाकों के भूगर्भ जल में क्रोमियम मिला हुआ है। क्रोमियम की वजह से लोगों की सेहत खराब हो रही है। उन्हें विभिन्न प्रकार के रोग हो रहे हैं। इस पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से जाजमऊ और दूसरे इलाकों में कैंप लगाकर लोगों की जांच की गई और उनके सैंपल लिए गए। साथ ही इन क्षेत्रों के पानी के सैंपल की भी जांच कराई थी। रिपोर्ट में क्रोमियम युक्त पानी की पुष्टि हुई है।

 

#Chromium Free Water

Source : Agency

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