Friday, May 15th, 2026

बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव, विधानसभा और विधान परिषद में नई जिम्मेदारियां तय

 पटना

 बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने विधानसभा और विधान परिषद में बड़ा राजनीतिक और संगठनात्मक फेरबदल कर साफ संकेत दे दिया है कि आने वाले सत्रों में सत्ता पक्ष आक्रामक रणनीति के साथ मैदान में उतरने वाला है।

सरकार ने दोनों सदनों में मुख्य सचेतक, उप मुख्य सचेतक, सचेतक और उप नेता जैसे अहम पदों पर नई नियुक्तियां कर संगठन को धार देने की कोशिश की है।

इस बदलाव को सिर्फ औपचारिक नियुक्ति नहीं, बल्कि सत्ता और संगठन के बीच तालमेल मजबूत करने की बड़ी तैयारी माना जा रहा है। खास बात यह है कि इस फेरबदल में कई पुराने और सक्रिय नेताओं को अहम जिम्मेदारी देकर राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश भी दिख रही है।

विधानसभा में संजीव चौरसिया को बड़ी जिम्मेदारी
बिहार विधानसभा में भाजपा विधायक संजीव चौरसिया को मुख्य सचेतक बनाया गया है। वहीं मनजीत कुमार सिंह को उप मुख्य सचेतक की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

राजनीतिक हलकों में इसे सदन के भीतर सरकार की रणनीति को और मजबूत करने की कवायद माना जा रहा है।

सरकार चाहती है कि आगामी विधानसभा सत्रों में विपक्ष के हमलों का जवाब अधिक संगठित तरीके से दिया जाए।

इसी वजह से ऐसे नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है जो सदन की कार्यवाही और संगठन दोनों में सक्रिय माने जाते हैं।

विधान परिषद में भी बड़ा संतुलन साधा गया
विधान परिषद में भी कई अहम बदलाव किए गए हैं। ललन कुमार सराफ और राजेंद्र प्रसाद गुप्ता को उप नेता बनाया गया है।

वहीं संजय कुमार सिंह को मुख्य सचेतक और जनक राम को उप मुख्य सचेतक की जिम्मेदारी दी गई है।

इसके अलावा नीरज कुमार और रीना देवी को सचेतक नियुक्त किया गया है। माना जा रहा है कि परिषद में सरकार अपनी मौजूदगी और समन्वय को और मजबूत करना चाहती है ताकि विधायी कामकाज में किसी तरह की बाधा न आए।

कई विधायकों को मिला संगठन में नया रोल
विधानसभा में कई विधायकों को सचेतक बनाकर सरकार ने क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधने का भी प्रयास किया है।

जिन नेताओं को यह जिम्मेदारी मिली है उनमें गायत्री देवी, राजू तिवारी, रामविलास कामत, सुधांशु शेखर, राणा रणधीर, ललित नारायण मंडल, कृष्ण कुमार ऋषि, अरुण मांझी और रत्नेश कुमार शामिल हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकार ने ऐसे चेहरों को आगे बढ़ाया है जो अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय और प्रभावशाली माने जाते हैं। इससे सत्ता पक्ष को सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह फायदा मिल सकता है।

आखिर क्यों अहम होते हैं सचेतक?
सदन की राजनीति में सचेतकों की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। इनकी जिम्मेदारी पार्टी विधायकों और विधान पार्षदों की उपस्थिति सुनिश्चित करना, पार्टी लाइन के अनुसार मतदान कराना और सदन के भीतर अनुशासन बनाए रखना होता है।

सरकार जब किसी बड़े विधेयक या महत्वपूर्ण फैसले को सदन में लाती है तो सचेतकों की भूमिका और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है। यही वजह है कि इन पदों पर भरोसेमंद नेताओं की नियुक्ति की जाती है।

सम्राट चौधरी ने भेजा आधिकारिक पत्र
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इन नियुक्तियों को लेकर बिहार विधानसभा अध्यक्ष और विधान परिषद सभापति को आधिकारिक पत्र भेज दिया है। माना जा रहा है कि यह बदलाव आने वाले राजनीतिक और विधायी समीकरणों को ध्यान में रखकर किए गए हैं

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सम्राट सरकार अब सदन के भीतर ज्यादा आक्रामक और संगठित रणनीति के साथ आगे बढ़ने की तैयारी में है।

 

#Bihar Assembly

Source : Agency

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