Saturday, May 16th, 2026
Breaking
  •    मंत्री दयाल दास बघेल ने बाल वैज्ञानिक सृष्टि और पीयूष को किया सम्मानित मांडल राष्ट्रीय विज्ञान मेला दिल्ली के लिए चयनित  •    पेट्रोल-डीजल बचत पर PM मोदी की अपील, लॉकडाउन को लेकर किरेन रिजिजू का बड़ा बयान  •    विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को मिली नई गति: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रायगढ़ को दी 102 करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों की सौगात  •    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दिखाई संवेदनशील और जिम्मेदार प्रशासनिक कार्यशैली : ईंधन बचत, समय प्रबंधन और सुशासन का समन्वित मॉडल बनी समीक्षा बैठक  •    राज्यपालरमेन डेका ने किया पौधरोपण, कवर्धा कलेक्ट्रेट परिसर में रोपा आम का पौधा, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

भालुओं का आतंक: विभाग सोया, जनता डरी

NH-43 से सिद्धबाबा तक खतरे की घंटी, फिर भी "भालू नहीं हैं" का राग

मनेंद्रगढ़

क्या भालू जंगल छोड़कर शहर की चौखट पर आ गए हैं? या फिर वन विभाग की आंखों पर "नजर बंद" का ताला लग गया है?
NH-43 से सिद्धबाबा धाम (पहाड़) जाने वाली सड़क पर इन दिनों भालुओं की धमक साफ देखी जा सकती है। स्थानीय लोग कह रहे हैं – सावधान रहें, लेकिन विभाग कह रहा है – "भालू नहीं हैं"!

सवाल ये है कि जब वार्ड क्रमांक 1 में रोजाना भालू घूमते नजर आते हैं, सिद्धबाबा पहाड़/जंगल से लेकर रेलवे कॉलोनी और चनवारीडांड तक लगभग एक दर्जन भालू विचरण कर रहे हैं, तो आखिर विभाग का दावा किस आधार पर है?

लोगों का कहना है कि अंधेरा होते ही जंगल में तफरी करना खतरे से खाली नहीं है। युवाओं की आवाजाही और रोमांच की चाहत कहीं जान पर भारी न पड़ जाए।

DFO कार्यालय में भी इस मुद्दे पर बवाल मच चुका है, लेकिन अब तक न तो कोई ठोस कदम उठाया गया और न ही भालुओं की निगरानी बढ़ाई गई।
क्या वन विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?

जनता की मांग :-

भालुओं की सटीक गिनती और लोकेशन ट्रैक की जाए।

खतरे वाले इलाकों में चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं।

रात्रि गश्त और पिंजरा अभियान चलाया जाए।


जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, भालुओं का आतंक और विभाग की चुप्पी—दोनों ही खतरनाक हैं।

 

Source : Agency

आपकी राय

13 + 3 =

पाठको की राय