Saturday, May 16th, 2026
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Unified Pension Scheme: कुछ अधिकारियों ने ही चुना विकल्प, कर्मचारियों में उत्साह नहीं

भोपाल
 भारत सरकार द्वारा लागू एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) को लेकर मध्य प्रदेश के कर्मचारियों में कोई रुचि नहीं है। किसी भी संगठन ने इसे लेकर पहल नहीं की है। अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों में भी कुछ ने ही इस विकल्प को चुना है। उधर, राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) को लगातार विस्तार दिया जा रहा है। अब कर्मचारी सरकारी प्रतिभूति में सौ प्रतिशत तक निवेश कर सकते हैं। इस योजना में चार लाख 60 हजार अधिकारी-कर्मचारी हैं।

पुरानी पेंशन बहाली की मांग के बीच सरकार ने कर्मचारियों को साधने के लिए राष्ट्रीय पेंशन योजना के साथ-साथ एकीकृत पेंशन योजना का विकल्प कर्मचारियों को दिया है। भारत सरकार की इस योजना को लेकर अधिकारी-कर्मचारी उत्साहित नहीं हैं। प्रदेश में इसे लागू करने के लिए उच्च स्तरीय समिति तो गठित की गई पर इसकी बैठक ही नहीं हुई। दरअसल, अभी योजना को लेकर स्पष्टता नहीं है, जिसके कारण सरकार भी जल्दबाजी में नहीं है।

लगातार किए जा रहे हैं संशोधन

उधर, राष्ट्रीय पेंशन योजना में लगातार संशोधन किए जा रहे हैं। अब यह प्रविधान किया गया है कि जो कर्मचारी जोखिम नहीं उठाना चाहते हैं वे सरकारी प्रतिभूति में सौ प्रतिशत तक निवेश कर सकते हैं। वहीं, म्यूचुअल फंड सहित अन्य व्यवस्थाओं में निवेश के लिए अधिकतम सीमा को 50 से बढ़ाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया है।

योजना में कर्मचारी को यह अधिकार दिया गया है वो निवेश के लिए फंड मैनेजर का चयन कर सकते हैं। एक वर्ष में फंड चयन की सुविधा एक बार और निवेश पद्धति में परिवर्तन के लिए दो बार ही रहेगी।

क्यों नहीं जुड़ रहे हैं लोग?

हालांकि, यूपीएस में लंबी सर्विस ड्यूरेशन, मंथली कॉन्ट्रीब्यूशन, टाइम से पहले रिटायरमेंट की सिचुएशन में लिमिटेड बेनिफिट्स, और फैमिली पेंशन के लिए लिमिटेड डेफिनिशन को लेकर डिससैटिस्फैक्शन की वजह से, 27 लाख सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज में से सिर्फ करीब 1% ने ही यूपीएस को चुना. सर्विस के दौरान डेथ होने पर मिलने वाले बेनिफिट्स की क्लैरिटी न होने, टैक्सेशन और यूपीएस अपनाने से पहले कॉस्ट वर्सेज बेनिफिट की चिंता से लोग इसे चुनने से बच रहे हैं. क्योंकि एक बार सलेक्ट करने पर इससे बाहर नहीं जाया सकता है. हालांकि, इसके लिए अभी हाल में ही सरकार ने वनटाइम वन वे स्विच का ऑप्शन दिया है, लेकिन उसकी अपनी सीमाएं हैं.

UPS के लिए गवर्नमेंट के उठाए कदम

जुलाई में, सेंटर ने मार्केट-लिंक्ड एनपीएस के तहत मिलने वाले इनकम टैक्स बेनिफिट्स को यूपीएस तक एक्सटेंड किया, जिसमें रिटायरमेंट पर 60% फंड की टैक्स-फ्री विड्रॉल शामिल है. इसने गवर्नमेंट एम्प्लॉई की डेथ, डिसएबिलिटी या डिसमिसल की सिचुएशन में ओपीएस के बेनिफिट्स को भी इंप्रूव किया. सेंटर ने यूपीएस के तहत एम्प्लॉइज को रिटायरमेंट ग्रेच्युटी और डेथ ग्रेच्युटी का बेनिफिट भी दिया. इसने एनपीएस से यूपीएस में स्विच करने की डेडलाइन को 30 जून से बढ़ाकर 30 सितंबर कर दिया. पिछले हफ्ते, इसने यूपीएस से एनपीएस में वन-टाइम वन-वे स्विच फैसिलिटी स्टार्ट की. यूपीएस चुनने वाले कर्मचारी इसे रिटायरमेंट से एक साल पहले तक या वॉलंटरी रिटायरमेंट के केस में रिटायरमेंट डेट से तीन महीने पहले तक यूज कर सकते हैं.

यूपीएस में फिस्कल इंप्लीकेशन

यूपीएस को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह गवर्नमेंट फाइनेंस पर गैरजरूरी कॉस्ट का असर न डाले. गारंटी एलिमेंट की वजह से एक्स्ट्रा एक्सपेंडिचर का अनुमान फाइनेंशियल ईयर 26 में सिर्फ 8,500 करोड़ रुपये था, जो टाइम के साथ ग्रैजुअली बढ़ेगा, क्योंकि सैलरी स्केल रिवाइज होते हैं और न्यू पीपल सर्विस में जॉइन करते हैं.

हालांकि, कर्मचारियों के नंबर में न्यू एडिशन्स पर जनरल कंट्रोल से एक्सपेंसेस पर कंट्रोल रहने की उम्मीद है. चूंकि, 2036 के बाद लोग यूपीएस के तहत रिटायर होंगे और उनमें से कुछ के साथ-साथ फैमिली पेंशनर्स की भी डेथ हो सकती है. ऐसी स्थिति में उनकी पेंशन कैपिटल अमाउंट कर्मचारी के सक्सेसर्स को रिटर्न नहीं की जाएगी. इससे फ्यूचर में बजट पर ज्यादा डिपेंड हुए बिना पेंशन के लिए गवर्नमेंट के रिसोर्सेज को इंप्रूव करने में हेल्प मिलेगी. हर पे कमीशन के डिसीजन के बाद बेसिक पेंशन को रीसेट नहीं किया जाएगा, जैसा कि ओपीएस में होता था.

 

#Unified Pension Scheme

Source : Agency

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